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DASHkavita
D23 – दामिनी! — अब और नहीं
दामिनी ! जीना चाहती थीं तुम कहा भी था तुमने बार बार दरिंदों से चींथी हुई देह से जूझते हुए मौत से लडती रही बारह दिन कोमा में…
D16 – कहाँ है मेरा हिंदुस्तान? मैं उसको ढूँढ़ रहा हूँ!
मुसलमाँ और हिन्दू की जान कहाँ है मेरा हिंदुस्तान? मैं उसको ढूँढ़ रहा हूँ! मेरे बचपन का हिंदुस्तान न बंगलादेश, न पाकिस्तान मेरी आशा मेरा अरमान वो पूरा-पूरा…