D13 – देव आनंद : हिंदी सिनेमा के सदाबहार रोमांटिक नायक
देव आनंद भारतीय सिनेमा के उन विरले कलाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने अभिनय, निर्देशन, निर्माण और प्रतिभाओं को मंच देने के क्षेत्र में अमिट छाप छोड़ी। उनका वास्तविक नाम धरमदेव पिशोरीमल आनंद था। उनका जन्म 26 सितंबर 1923 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था। छह दशकों से अधिक लंबे फिल्मी जीवन में उन्होंने 100 से अधिक फिल्मों में अभिनय किया और भारतीय सिनेमा को नई दिशा दी। उन्हें भारत सरकार ने पद्म भूषण (2001) और भारतीय सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान दादासाहेब फाल्के पुरस्कार (2002) से सम्मानित किया।
अभिनय की अनोखी शैली
देव आनंद की तेज संवाद-अदायगी, विशिष्ट मुस्कान, सिर हिलाने का अंदाज और रोमांटिक व्यक्तित्व उन्हें अन्य अभिनेताओं से अलग बनाता था। 1946 में फिल्म हम एक हैं से शुरुआत करने के बाद ज़िद्दी (1948) ने उन्हें लोकप्रियता दिलाई। इसके बाद बाज़ी, टैक्सी ड्राइवर, सी.आई.डी., काला पानी, हम दोनों, गाइड, ज्वेल थीफ और जॉनी मेरा नाम जैसी फिल्मों ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया।
नवकेतन : प्रतिभाओं की पाठशाला
1949 में देव आनंद और उनके भाई चेतन आनंद ने नवकेतन फिल्म्स की स्थापना की। यह बैनर आगे चलकर हिंदी सिनेमा की सबसे प्रतिष्ठित निर्माण संस्थाओं में शामिल हुआ। नवकेतन ने अनेक नए कलाकारों, निर्देशकों और तकनीशियनों को अवसर प्रदान किए।
देव आनंद द्वारा प्रोत्साहित या प्रस्तुत प्रमुख कलाकार
देव आनंद केवल महान अभिनेता ही नहीं, बल्कि नई प्रतिभाओं के खोजी भी थे।
| कलाकार | परिचय / प्रमुख फिल्म |
|---|---|
| ज़ीनत अमान | हरे रामा हरे कृष्णा (1971) से बड़ी पहचान मिली; देव आनंद की खोज मानी जाती हैं। |
| टीना मुनीम (टीना अंबानी) | देस परदेस (1978) से हिंदी फिल्मों में प्रमुख शुरुआत। |
| ज़ाहिदा | प्रेम पुजारी के माध्यम से प्रमुख पहचान मिली। |
| जैकी श्रॉफ | शुरुआती अवसर और प्रोत्साहन देने वालों में देव आनंद का नाम लिया जाता है। |
| तब्बू | हम नौजवान (1985) में बाल कलाकार के रूप में महत्वपूर्ण अवसर। |
प्रमुख फिल्मोग्राफी
1940–1950 का दशक
- हम एक हैं (1946)
- ज़िद्दी (1948)
- बाज़ी (1951)
- जाल (1952)
- टैक्सी ड्राइवर (1954)
- मुनीमजी (1955)
- सी.आई.डी. (1956)
- पेइंग गेस्ट (1957)
- काला पानी (1958)
1960 का दशक
- काला बाज़ार (1960)
- हम दोनों (1961)
- तेरे घर के सामने (1963)
- गाइड (1965)
- ज्वेल थीफ (1967)
1970 का दशक
- जॉनी मेरा नाम (1970)
- प्रेम पुजारी (1970)
- हरे रामा हरे कृष्णा (1971)
- तेरे मेरे सपने (1971)
- हीरा पन्ना (1973)
- अमीर गरीब (1974)
- वारंट (1975)
- देस परदेस (1978)
1980 के बाद
- लूटमार (1980)
- हम नौजवान (1985)
- लश्कर (1989)
- चार्जशीट (2011) – उनकी अंतिम फिल्म।
पुरस्कार और सम्मान
- पद्म भूषण (2001)
- दादासाहेब फाल्के पुरस्कार (2002)
- फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता – काला पानी
- फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता – गाइड
- फिल्मफेयर लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड (1993)
विरासत
3 दिसंबर 2011 को लंदन में देव आनंद का निधन हुआ, लेकिन उनकी फिल्मों का आकर्षण आज भी बरकरार है। उन्हें “एवरग्रीन स्टार” कहा जाता है क्योंकि उम्र बढ़ने के बावजूद उनकी ऊर्जा, आशावाद और रोमांटिक व्यक्तित्व कभी फीका नहीं पड़ा। उन्होंने भारतीय सिनेमा को न केवल अनेक यादगार फिल्में दीं, बल्कि नई प्रतिभाओं को मंच देकर उसकी दिशा भी तय की। आज भी गाइड, ज्वेल थीफ, हरे रामा हरे कृष्णा और जॉनी मेरा नाम जैसी फिल्में भारतीय सिनेमा की धरोहर मानी जाती हैं।