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D14 – हृषिकेश मुखर्जी : भारतीय सिनेमा के संवेदनशील कथाकार

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भारतीय सिनेमा के इतिहास में यदि ऐसे फिल्मकारों की सूची बनाई जाए जिन्होंने मनोरंजन और सामाजिक संवेदनशीलता के बीच संतुलन स्थापित किया, तो हृषिकेश मुखर्जी का नाम सबसे ऊपर आता है। “हृषिदा” के नाम से प्रसिद्ध हृषिकेश मुखर्जी ने हिंदी सिनेमा को ऐसी फिल्में दीं जो आज भी अपनी सादगी, मानवीय मूल्यों और जीवन-दर्शन के कारण दर्शकों के दिलों में जीवित हैं।

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30 सितंबर 1922 को कोलकाता में जन्मे हृषिकेश मुखर्जी ने विज्ञान विषय से शिक्षा प्राप्त की और कुछ समय तक अध्यापन कार्य भी किया। बाद में वे प्रसिद्ध फिल्मकार बिमल रॉय के साथ मुंबई आए और फिल्म संपादन तथा सहायक निर्देशन के क्षेत्र में कार्य किया। उनकी संपादन कला और कहानी कहने की अद्भुत क्षमता ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे सम्मानित निर्देशकों में स्थान दिलाया।

हृषिकेश मुखर्जी को भारतीय सिनेमा में “मिडिल सिनेमा” का अग्रदूत माना जाता है। उनकी फिल्मों में आम भारतीय मध्यमवर्गीय परिवारों की समस्याएँ, रिश्तों की ऊष्मा, हास्य, संघर्ष और जीवन के छोटे-छोटे सुख-दुःख बड़ी सहजता से दिखाई देते हैं। उन्होंने न तो व्यावसायिक सिनेमा की चकाचौंध को पूरी तरह अपनाया और न ही कला फिल्मों की जटिलता को; बल्कि दोनों के बीच एक ऐसा रास्ता चुना जो करोड़ों दर्शकों के दिलों तक पहुँचा।

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उनकी फिल्मों में “आनंद”, “अभिमान”, “गुड्डी”, “बावर्ची”, “नमक हराम”, “चुपके चुपके”, “गोलमाल”, “खूबसूरत” और “मिली” जैसी कालजयी कृतियाँ शामिल हैं। “आनंद” में जीवन और मृत्यु के दर्शन को जिस भावुकता और संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया गया, वह आज भी हिंदी सिनेमा की श्रेष्ठतम फिल्मों में गिनी जाती है। वहीं “गोलमाल” और “चुपके चुपके” जैसी हास्य फिल्मों ने साबित किया कि स्वच्छ और बुद्धिमत्तापूर्ण हास्य भी दर्शकों का भरपूर मनोरंजन कर सकता है।

हृषिकेश मुखर्जी केवल निर्देशक ही नहीं, बल्कि उत्कृष्ट संपादक और पटकथा लेखक भी थे। उन्होंने लगभग चार दशकों के करियर में 40 से अधिक फिल्मों का निर्देशन किया और भारतीय सिनेमा को कई यादगार कलाकार तथा अमर चरित्र दिए।

Hrishikesh Mukherjee and his ‘maharaj’ Amitabh Bachchan: ‘Gurupita’ who gave Big B his break, had him laughing in Anand’s climax | Bollywood News - The Indian Express

27 अगस्त 2006 को उनका निधन हो गया, किंतु उनकी फिल्में आज भी दर्शकों को हँसाती, रुलाती और जीवन को समझने की प्रेरणा देती हैं। भारतीय सिनेमा में उनका योगदान सदैव अमिट रहेगा।

प्रमुख फिल्में (Filmography)

वर्षफिल्म
1957मुसाफिर
1959अनाड़ी
1960अनुराधा
1962असली-नकली
1966अनुपमा
1968आशीर्वाद
1969सत्यकाम
1971आनंद
1971गुड्डी
1972बावर्ची
1973अभिमान
1973नमक हराम
1975चुपके चुपके
1975मिली
1979गोलमाल
1980खूबसूरत
1981नरम गरम
1983रंग बिरंगी
1983किसी से ना कहना
1998झूठ बोले कौआ काटे
Streaming Guide: Hrishikesh Mukherjee films | Bollywood News - The Indian Express

पुरस्कार एवं सम्मान

  • दादा साहेब फाल्के पुरस्कार (1999) – भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान।
  • पद्म विभूषण (2001) – भारत का दूसरा सर्वोच्च नागरिक सम्मान।
  • एन.टी.आर. राष्ट्रीय पुरस्कार (2001)।
  • आठ फिल्मफेयर पुरस्कार।
  • फिल्म “आनंद” के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म एवं सर्वश्रेष्ठ कहानी का फिल्मफेयर पुरस्कार।
  • फिल्म “खूबसूरत” के लिए सर्वश्रेष्ठ फिल्म का फिल्मफेयर पुरस्कार।
  • “अनुराधा” को बर्लिन अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में गोल्डन बियर नामांकन प्राप्त हुआ।

हृषिकेश मुखर्जी की विरासत

हृषिकेश मुखर्जी ने भारतीय सिनेमा को यह सिखाया कि बिना भव्य सेटों और अत्यधिक नाटकीयता के भी उत्कृष्ट फिल्में बनाई जा सकती हैं। उनकी फिल्मों में जीवन का यथार्थ, रिश्तों की गर्माहट और मानवीय संवेदनाएँ इतनी गहराई से समाहित हैं कि वे आज भी हर पीढ़ी को समान रूप से आकर्षित करती हैं। यही कारण है कि हृषिदा को भारतीय सिनेमा का “संवेदनशील कथाकार” कहा जाता है।

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